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दुःख
आँसू ही रहे मेरे जीवन की कथा न समझी किसी ने मेरी व्यथा, मेरे सपनों अरमानों को खरीदा बेचा, बार-बार जैसे मेरा दिल था कोई बाजार, यू रोम -रोम मेरा रोए , जैसे नयन मेरे सदियों से न सोए । - दुःख लोगों को कवि बना देता हैं और खुशी संगीतकार दुःख कभी-कभी अच्छा होता हैं पर उसमें खुद को खो देना सही नहीं हैं । । दुःख मे लोग कवि तो बन जाता हैं ,पर फिर खुद से कभी नहीं मिल पाता हैं दुनिया तो हमें जान जाती हैं पर हम खुद से अनजान हो जाते हैं खुद का अस्तित्व खोकर कवि तो बन जाते हैं ,खुद को जानकर दुनिया से अनजान हो जाते हैं ।https://yout
नींद तो मूर्ख होती हैं जो कभी भी आ जाती हैं । ।। . पर गुस्सा केवल अपनो पर आता है।। इसलिये अपनो कि बातों को दिल से नहीं लगना चाहिए क्योंकि वे आप बहुत प्रेम करते हैं इसलिए क्रोध भी आप ही करते हैं।
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